जिंदगी मुस्कुराते बिता रहा हूँ 

मुस्कराते बिताओ जिंदगी प्रतिदिन
ठोकर खाना सीखते रहो हरदिन
यही सीखाता है कितने अनमोल है दिन
नयी ऊंचाई पहुंचनेका रास्ता प्रतिदिन || १ ||

बचपन चलगया बड़ी मुस्किल में
खुशि कभी कम नहीं थी दिल में
आज सब कुछ है मेरे पास
फिर भी क्यों में हूँ इतना उदास || २ ||

गाडी बांग्ला कार सब है मेरे पास
फिर भी नहीं भुजती मेरे मन का प्यास
हर रोज़ दौड़ता हूँ जिंदगी में
फिर भी शांति दस्तक नहीं देती मन में  || ३||

किसीने कहा कभी जिंदगी मुड़के तो देखो
वो हसीन पल याद के तो देखो
अपनोंके साथ समय बिताके देखो
फिर प्यास अपने आप भुजते देखो  ||४ ||

प्यार मोहबत बांटते  चला हूँ
दुनियाको सही रास्ता सिखाते चला हूँ
मेरा उदास ग्रस्त होते हुए देखा हूँ
जिंदगी मुस्कुराते बिता रहा हूँ  || ५ ||

-दिलीप दीक्षित

Comments

Popular posts from this blog

ಪ್ರವಾಸದ ನೆನಪುಗಳು - ಸಂಚಿಕೆ 1

ಮಹಾಭಾರತ- ಆದಿ ಪರ್ವ

ಶ್ರೀ ಕ್ಷೇತ್ರ ಗೋಕರ್ಣ ಚರಿತ್ರೆ